JANMANCH

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इतिहास के लिए जरूरी हैं आतंकवादी

Posted On: 18 Jul, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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लीजिये साहब फिर से बम धमाके, ऐसा लगता है की आतंकवादी जब ट्रेनिंग लेकर तैयार हो जाते हैं तो

प्रक्टिस करने के लिए भारत आ जाते हैं चलो यहीं पर अभ्यास कर लें, और देशों में तो दिक्कत आएगी, ये सर्वसुलभ देश है जब चाहो अभ्यास किया और जब मन आया यहाँ आये घूमे फिरे लूट पाट की चले गए.  आतंकवादियों को पता है की इस देश की सरकार ” अतिथि देवो भव” की तर्ज पर आतंकवादियों की बड़ी इज्ज़त करती है और बड़े संभालकर रखती है. जितने चाहो नागरिकों को बम से उडाओ, एक सौ इकतीस करोड़ हैं  कोई कमी नहीं आएगी ये आतंकवादी ही थक गए तो बात अलग है. सरकार भी हर बार कहती है की आतंकवादियों को मुहतोड़ जवाब दिया जाएगा, पब्लिक  भी सोचती है की भाई ऐसा कौन सा जवाब जिससे मुहं टूट  जाताहै…… इसका सीधा सा अर्थ है उनको तब जवाब देंगे जब हमारा मुहं टूट जाएगा, तो साहब जब तक सबके मुहं न टूट जाएँ तब तक तो आतंकवादियों को सरकार कुछ नहीं कहेगी.

आतंकवादी घटनाओं को रोका नहीं जा सकता ये कहना है श्रीमान राहुल जी का, सही बात अगर रोक दिया तो कैसे पता चलेगा की हमारी मेहमाननवाजी की छाप विदेशों तक कैसे पहुंचेगी. कैसे पता चलेगा की हम दुश्मनों से भी कितना ज्यादा प्यार करते हैं ९/११ के बाद से अमेरिका ने अपने यहाँ एक भी आतंकी घटना नहीं होने दी इससे पता चलता है वो लोग कितने खुश्क मिजाज़ लोग हैं और मनुष्यता के कितने खिलाफ…………

विद्वानों का कहना है की अपनी इतिहास से सबक सीखना चाहिए और घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने देनी चाहिए लेकिन ये भी तो सोचिये की यदि गलती पुनरावृत्ति नहीं की तो इतिहास में क्या लिखेंगे इसीलिए हमने इतिहास से क्या सीखा ये बताने की कोई जरूरत नहीं बल्कि हमें इतिहास में ये लिखवाना चाहिए की यहाँ की सरकार हमेशा से मजबूत प्रकृति की रही और कोई भी एतिहासिक घटना सरकार के विचारों को डिगा नहीं सकी सरकारें अपने कार्य में मग्न और इतिहास अपने बार बार दोहराने पर आमादा. सिर्फ इतिहास के डर से हम आतंकवादियों को मारें…..हिंसा करें नहीं कदापि नहीं इतिहास गवाह है विदेशी आक्रमणकारी  बार बार आये पर हम बिलकुल नहीं सुधरे……. जब वो नहीं सुधरे तो हम क्यों सुधर जाते…….. ! कमजोर प्रकृति के लोग में बदलाव होता है और हमारी सरकार तो कभी भी कमजोर नहीं रही…… आज से ही नहीं प्राचीन काल से ही …….. सोमनाथ का मंदिर बार बार लुटा और हम लुटवाते रहे, गौरी बार बार आया हारा और हम छोड़ते रहे जब तक की वो जीत न गया,  भाई जो गलती हम बार बार कर सकते हैं कोई और तो कर ही नहीं सकता……..! जो भी विदेशी भारत आया उसने लूटा और हम लूटे पर इस डर से हम सुधरे नहीं. हमारी धन सम्पन्नता और भलमनसाहत को देख कर विदेशियों ने निरंतर आक्रमण किये……..! हालांकि उन विदेशी आक्रमणकारियों को भारत आने में बहुत तकलीफों का सामना भी करना पड़ता था तो हमने उनको यहीं पर बस जाने की नेक सलाह के साथ रोक लिया…. अब आक्रमण कम हो गए हैं पर बाहर लूट का माल तो पहुंचना जरूरी है हमारी  भारतीय सरकार बड़ी परेशान की कोई हमें लूटने नहीं आ पा रहा hai, वो तो भला हो स्वीटजरलैंड का जो स्विस बैंक बना लिया और हमारे नेता लूट का माल स्वयं ही बाहर ले जाने लगे वर्ना आज तक  विदेशी भुखमरी के आलम में जी रहे होते, और हम से उनकी ये दुर्दशा देखि न जाती…….!  लेकिन अब सब ठीक हैं अब हम स्वयं ही अपने आप को लूट रहे हैं.

कुछ मूर्ख लोग सरकार पर निष्क्रियता का आरोप मढ़ते हैं…. परन्तु उन्हें क्या पता की यदि आतंकवादी गतिविधि रुक गयी इतिहास में क्या लिखेंगे….. और इसके फायदे भी हैं एक तो ये काम भी थोडा मजेदार है दूसरा कितने सारे लोगों को काम मिल जाता है डोक्टर… बिजी, दवाइयों की बिक्रीहोती है, उद्योग फलफूल रहा है, मिडिया बिजी……. पत्रकार लोग जब किसी घायल से पूछते हैं की “ आपकी जब बम से टांग उड़ गयी तो आपको कैसा महसूस हुआ आपको कहाँ दर्द हुआ…….. ”  तो दर्शक मुस्कराए बिना नहीं रह पाते …….. और आज के इस दौर में जब इंसानियत सिसक सिसक कर दम तोड़ रही है तो छणिक मुस्कराहट की भी बहुत कीमत है. फिर वो चाहे किसी की टांग तोड़कर आये या जनाजे में शामिल होकर……. लेकिन किसी को कोई अधिकार नहीं की वो हमारी एतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाए…………… इसलिए न हम सुधरे थे न सुधरेंगे…….. चाहे कितने ही बम फटें लेकिन लाशों को गिनते समय हम ये जरूर गिनेंगे की कितने हिन्दू थे और कितने मुस्लिम….. जब दंगों से पीड़ित लोगों की गड़ना होगी तो ये हिसाब भी रखना जरूरी होगा कितने पिछड़े थे कितने दलित कितने सामान्य………. ऐसा नहीं करेंगे तो इतिहास में क्या लिखेंगे की भारत केवल भारतवासियों का देश था. ………….और वहां कोई नहीं था इससे हमारी सारे विश्व में एतिहासिक बेइज्जती नहीं हो जायेगी.

इसलिए यदि आतंकवाद बढ़ता है तो बढ़ने दो, प्रधानमन्त्री मौन हैं तो रहने दो, जनता स्वार्थ में लिप्त है तो रहने दो, कालाधन विदेशों में जमा हो रहा है तो होने दो, दंगे होते हैं तो होने दो, देश लुटता है तो लुटने दो क्योंकि ये सब इतिहास में दर्ज होगा और जब कोई घटना ही घटित नहीं होगी तो इतिहास कैसे लिखा जाएगा….!



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65 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

free web traffic links bonus #1 के द्वारा
June 30, 2014

awesome blog, thank you

litt के द्वारा
August 1, 2011

सटीक कहा आपने ……….

    munish के द्वारा
    August 1, 2011

    शुक्रिया

surendr kumar shukl bhramar5 के द्वारा
July 27, 2011

मुनीश जी अभिवादन सार्थक लेख सुन्दर और गंभीर विषय ये सब ऐसे मुद्दे हैं जिन पर इनके कानों में जूँ तक रेंगती नहीं -इन का चमड़ा मोटा हो गया है और इतनी सशक्त जरूरत पड़ गयी है जो खाल उतार सके /…..ताकि ये इतिहास बन जाएँ इसलिए न हम सुधरे थे न सुधरेंगे…….. चाहे कितने ही बम फटें लेकिन लाशों को गिनते समय हम ये जरूर गिनेंगे की कितने हिन्दू थे और कितने मुस्लिम….. जब दंगों से पीड़ित लोगों की गड़ना होगी तो ये हिसाब भी रखना जरूरी होगा कितने पिछड़े थे कितने दलित धन्यवाद शुक्ल भ्रमर ५

    munish के द्वारा
    July 28, 2011

    शुक्ल भ्रमर जी, आपकी अमूल्य टिप्पड़ी के लिए धन्यवाद……इसमें कोई शक नहीं की आज की परिस्थिति के लिए सरकार ही दोषी है…….. परन्तु हम देशवासियों का भी योगदान कम नहीं है. आजादी के बाद से हम ऐसे सोये जैसे कन्यादान के उपरान्त सोये हों देश की ओर से उदासीन…..

Jitendra के द्वारा
July 25, 2011

भाई कमल कर दिया दिल रो दिया पर रोने से क्या होगा यह सरकार तो अभीभी कुछ नहीं नहीं करने वाली ऐसा लगता है मीडिया भी कब तक अपना गला फाडेगा उसको तो रोज नहीं स्टोरी कहिये तभी तो TRP बढ़ेगी. खेर क्या लिखू इससे जादा दिल जलता

    munish के द्वारा
    July 26, 2011

    ठीक कहते हैं जीतेन्द्र भाई…..!

Nawal rawat के द्वारा
July 25, 2011

सर बहुत ही सुंदर लिखा है आपने …..

    munish के द्वारा
    July 25, 2011

    धन्यवाद रावतजी

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 23, 2011

मुनीश जी …आदाब ! इस आंतकवादियो के इतिहास ने तो आपको लाईमलाईट में लाकर एक नया इतिहास ही रच दिया है …. मेरी मुबारकबाद भी कबूल कर ही लीजिए तभी आंतकवाद हारेगा ! :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/07/20/“नज़र-–निगाह-–देखना”-–-नमक/#comments

    munish के द्वारा
    July 23, 2011

    धन्यवाद राजकमल जी, निश्चित ही आतंकवाद को हारने के लिए हम सबको एकजुट होना ही होगा

SYED SHAHENSHAH HAIDER ABIDI के द्वारा
July 23, 2011

ACHCHA VYANG HAI! DHANYAVVAD MUNISH!

    munish के द्वारा
    August 1, 2011

    शुक्रिया सैयद साहब

    munish के द्वारा
    July 23, 2011

    मिश्रा जी वन्दे मातरम! आपकी इस जानकारी के लिए धन्यवाद. काफी आश्चर्यजनक और तथ्य परक बातें है ये.

    Ramesh Nigam के द्वारा
    July 23, 2011

    Pl add Mr Dilip Pudgaonkar,the journalist of Kashmiri VARTAKAR Teem appointed by Dr Manmohan/Sonia.

    chaatak के द्वारा
    July 23, 2011

    मुनीश जी, सबसे पहले तो आपको इस धमाकेदार लेखन पर बधाई और सप्ताह से सबसे ज्यादा दर्शनीय ब्लॉगर बनने पर बधाई और फिर मिश्र जी को ये भंडा फोडू स्टाइल में बौराए बैसाखे ……. की मंडली का नाम सूचीबद्ध कर आम करने पर बधाई ! सभी राष्ट्रवादियों को वन्देमातरम !

    munish के द्वारा
    July 24, 2011

    वन्दे मातरम् चातक जी, ये बात तो सही है की आदरणीय मिश्राजी ने ये छुपी हुई जानकारी देकर इस लेख को पूर्ण कर दिया और आपकी टिप्पड़ी से इसका महत्त्व बढ़ गया साभार

    vikash के द्वारा
    July 26, 2011

    इन सबके सहयोग के बिना भारत में आतकवाद नहीं फल फ़ूल सकता .ये तो भारतीय आतंकवाद के गाडफादर है .इन बुध्हिजीवियों ,वरिस्थ पत्रकारों को हमारा सलाम .

    munish के द्वारा
    July 27, 2011

    सत्य वचन …..विकास जी

Mahendra Gupta के द्वारा
July 23, 2011

Dear Munish you have really written the truth of our history. It is not only today, it has been happening and will continue. we have not learned from our past mistakes and will never learn.

    munish के द्वारा
    July 23, 2011

    Thanks mamaji for your true comment. I am grateful to you. please read my other posts as well.

Martanday के द्वारा
July 23, 2011

यह आतंकवादी – फातंक्वादी कुछ नहीं है यह सब जान बूझकर करवाया जाता है | हमें तो लगता है की जनता का ध्यान बटाने के लिए यह सब हमारे so called नेताओं द्वारा सुनियोजित तरीके से करवाया जाता है | १३१ करोड़ में दो चार मर गए तो क्या फर्क पड़ता है राजनीती की रोटी तो सेंकने को मिल जाती है | बयान का क्या लचीली जबान है फिसल ही जाती है | AC में आरामदेह कुर्सी पर बैठकर, पब्लिक के पैसे से मेवा खाते हुए कुछ भी बक दो क्या फर्क पड़ता है, जनता बेवक़ूफ़ है दो दिन बाद भूल जाएगी, किसी को पकड़ लेंगे और उसकी जमाई खातीर की जाएगी, पडोसी देश पर आरोप थोप देंगे बस हो गया | पब्लिक भी भूल जाएगी और नेता मस्त और अगले घटना के लिए प्लान बनाना शुरू | कितना अच्छा business है ज़रा सोचिए, डाक्टर, दवाई बेचने वाले, बनाने वाले, अस्पताल, पुलिस, नेताजी सबकी कितनी अच्छी कमाई होती है | मीडिया वालो को मसाला मिल जाता है, उनमे होड़ लग जाती है की कौन कितना लाइव न्यूज़ देगा, कौन उस तड़पते हुए लहुलुहान इंसान को दुनिया को पहले दिखाकर अव्वल चैनल का खिताब पाएगा | इन सब घटनाओं से आम पब्लिक थोड़े दिनों तक बाकी समस्याओ के बारे में भूली रहती है और हमारे नेताओं को राजनीति की रोटी अच्छी तरह सेंकने का मौका मिल जाता है | इन्ही सब वजह से यह कहा गया है की “आतंकवादी घटनाओं को रोका नहीं जा सकता” (अगर रोक देंगे तो पब्लिक को बेवक़ूफ़ कैसे बनाएँगे)| हम सब ही को एकजुट होकर महानुभाव का नकाब पहने घर के अन्दर के आतंकिओं को बेनकाब करना होगा तभी कुछ हो पाएगा | वन्दे मातरम

    munish के द्वारा
    July 23, 2011

    खूब कहा परिस्थितियां हमारी ही बनायीं हैं | प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद |

    K M Mishra के द्वारा
    July 23, 2011

    मानव संसाधन मंत्रालय में कपिल सिब्बल के सलाहकार के रूप में अज़ीज़ बर्नी की नियुक्ति की गई है… यह अज़ीज़ बर्नी साहब वही हैं जिन्होंने 26/11 के मुम्बई हमले के बाद उस हमले की जिम्मेदारी RSS पर थोपने के उद्देश्य से एक पुस्तक भी लिखी है। पुस्तक का विमोचन दिग्विजय …सिंह ने किया था एवं इस पुस्तक में अज़ीज़ बर्नी ने कल्पना की ऊँची उड़ान भरते हुए 26/11 हमले के पीछे RSS और इज़राइल का हाथ होने सम्बन्धी किस्से गढ़े थे, बाद में दबाव बढ़ने पर माफ़ी भी मांगी गई और “उर्दू सहारा” से इस किस्सागो को लतियाया भी गया था। इसी अज़ीज़ बर्नी को “पाठ्यक्रम” में बदलाव हेतु सुझाव देने के लिए कपिल सिब्बल का सलाहकार नियुक्त किया गया है

Ramesh Nigam के द्वारा
July 23, 2011

Dear Munish, Whom r u trying to wake up by ur extraordinary post? Will u recall that the efforts of Adi Shanker, Swamis-Dayanand & Vivekanand, the great Chhatrpati Shivaji, the Sikh Gurus-Govind Singh and others, Bhagat Singh, Dhigra, Savarkar………………..Hedgewar and others miserably failed? Let us form groups to unite India and instill NATIONALISM in Indians: Group 1-Linguistic unity by publishing a list of words from other Bhartiy bhashayen, also publish beautifully printed popular Stories, Fables, Religious booklets of other languages in Devnagri Script and sell them at subsidized rates, apply pressure on media to popularize HINDI & SANSKRIT on national level, but remember that English and Urdu r not Indian languages but their study should not be neglected. Group 2-Rural resurgence by introducing Organic agri, Use of Bullock driven generators, Bullock Carts, DESHI Cow based Dairy business, Cultural centers & AKHARAS, Truly Bhartiy PATHSHALAYEN. Group 3-Afforestation through Fruit bearing plants and plants of utility produce like REETHA, Environment protecting plants like Pepal, Neem, Banana etc. Medicinal plants. Group 4-Population Control through Cash encouragement by awarding prize to those who have 1 or 2 child only.

    munish के द्वारा
    July 23, 2011

    निगम साहब निश्चित ही आपके सुझाव विचारनीय हैं और उन को अमल में भी लाया जाना चाहिए……. परन्तु बिना आज की परिस्थितियों को बदले ये सब मुश्किल ही होगा. साभार

    Ramesh Nigam के द्वारा
    July 24, 2011

    pahle murgi ya pahle anda?

J L SINGH के द्वारा
July 23, 2011

इसलिए यदि आतंकवाद बढ़ता है तो बढ़ने दो, प्रधानमन्त्री मौन हैं तो रहने दो, जनता स्वार्थ में लिप्त है तो रहने दो, कालाधन विदेशों में जमा हो रहा है तो होने दो, दंगे होते हैं तो होने दो, देश लुटता है तो लुटने दो क्योंकि ये सब इतिहास में दर्ज होगा और जब कोई घटना ही घटित नहीं होगी तो इतिहास कैसे लिखा जाएगा….! बहुत ही सशक्त प्रहार किया है आपने! पहले कलम में ताकत होती थी, पर आज पढ़नेवाले वाले शिर्फ़ प्रतिक्रिया व्यक्त कर चुप हो जाते हैं. हम कब जागेंगें? शायद अमरीका? ओबामा? हिलेरी तो सोनिया जी को सहलाकर चली गयी.दोनों की मुस्कुराहटें साफ़ बयान कर रही थी – मरनेवाले आम आदमी, कीड़े -मकोड़े थे. थोड़ा ठाकरे बंधुओं और विपक्षियों को भड़ास निकाल लेने दो. इस तरह महंगाई और भ्रष्टाचार का मुद्दा थोड़े दिन तक दबा रहेगा.

    munish के द्वारा
    July 23, 2011

    सिंह साहब, हम भारतियों की याददास्त बहुत कमजोर है और नींद बहुत अच्छी इसलिए कुछ भी हो जाए हम कोई प्रतिकृया नहीं देते……. शुक्रिया

Charchit Chittransh के द्वारा
July 22, 2011

मुनीश जी; नमन !!!!!! पढ़ते हुए लग रहा था जैसे मैं ही भारत हूँ ! भीष्म पितामह की तरह सरशैय्या पर लेटा हुआ…… चलरहे अंधेरगर्दी के अधर्मयुद्ध को होते हुए देखने को विवश …. और मेरे सामने एक बड़ा दर्पण हो ….. जिसमें दिख रहा वीभत्स प्रतिबिम्ब अट्टहास कर रहा हो …. और मैं भारत …. अश्रुपूरित आँखों से …कानों में पिघलते शीशे को आने से रोकने में असहाय … सब सहने को विवश ! सरशैया पर लेटा हुआ … मैं भारत …!!!

    Charchit Chittransh के द्वारा
    July 22, 2011

    क्षमा कीजिते एक जरूरी बात छूट गई … साधुवाद एवं बहुत बहुत वधाई !!!

    munish के द्वारा
    July 23, 2011

    चर्चित जी, आपने ठीक ही लिखा है आज की स्थिति को देखकर “भारत” किसी कोने में रोता होगा की क्या यही वो महान भारतवासी हैं जो अपनी महानता की डींगें मारने से नहीं थकते और यदि यही हैं तो हे भगवान् ऐसी महानता किसी मत दे …………..की वो देश अपने नागरिकों को देखकर खून के आंसू रोये. साभार

Tamanna के द्वारा
July 22, 2011

सबसे पहले तो ब्लॉगर ऑफ द वीक बनने के लिए हार्दिक बधाई मुनिष जी. आपका लेख वाकई बहुत सशक्त है.

    munish के द्वारा
    July 23, 2011

    शुक्रिया तमन्नाजी, आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग पर.

vikramjit singh के द्वारा
July 22, 2011

हा हा हा, मुनीश जी, मजाक मजाक में ही इतनी बड़ी और सार्थक बातें कर दी आपने, मजाक मजाक में ही मैंने भी कुछ कुछ ऐसा ही थोडा लिखा था…. परन्तु आपने तो कमाल कर दिया, ऐसी रचना न देखी न पढ़ी….. एक बार फिर से बधाई…

    munish के द्वारा
    July 22, 2011

    शुक्रिया विक्रम जी साभार

http://eyethe3rd.blogspot.com के द्वारा
July 22, 2011

आपने वाकई व्यंग्य और और कटाक्ष की भाषा में एक सटीक और साथर्क आलेख लिखा है, जो आलेख मात्र ही नहीं, बल्कि एक शोला है

anil gupta के द्वारा
July 22, 2011

क्या लिखा है भाई जी, क्या जबरदस्त लिखा है, भरोडिया जी, की प्रतिक्रिया पर आप किस शिक्षित समाज की बात कर रहे है. वही शिक्षित समाज जो बड़ी शान से कहते है ” I HATE POLITICS ”, अब भईया आपकी राजनीति में दिलचस्पी न हो लेकिन राजनीति न सिर्फ आप में दिलचस्पी रखती है , बल्कि वो आपके जीवन को हमेशा प्रभावित भी करती है . जो शिक्षित समाज आज तक इतना भी नहीं समझ सका उसे शिक्षित अनपड़ कहना ज्यादा उचित होगा.

K M Mishra के द्वारा
July 22, 2011

मुनीश जी वन्देमातरम,  हिंदू कायर होता है, गलती से एक क्रांति १८५७ में हो गयी थी क्योंकि उसमे सेना शामिल थी अन्यथा वह भी नहीं होती. गाँधी ने इस सत्य को समझा इसलिए कायर हिंदुओं को अहिंसा का हथियार दिया. पीट लो जितना पीटना है. बाद में थक कर हार मान लोगे. लेकिन आज तो हिंदुत्व छोडिये राष्ट्रवाद भी फासीवाद  माना जाता है. सेकुलर मीडिया धन्यवाद. 

    munish के द्वारा
    July 22, 2011

    आदरणीय मिश्राजी सादर वन्दे मातरम्, राष्ट्रवाद को फासीवाद बनाया जा रहा है इस षड़यंत्र में उसमें केवल सेकुलर मीडिया ही शामिल नहीं है बल्कि हम लोगों के निजी स्वार्थ भी इसमें शामिल हैं

    K M Mishra के द्वारा
    July 23, 2011

    मुनीश जी आपको जान कर आश्चर्य होगा की अमेरिका में गिरफ्तार हुए आई एस आई एजेंट गुलाम नबी फई के इन भारतीय लोगों से भी सम्बन्ध थे. ये है भारत में सेकुलर ढोंग के जाने पहचाने चेहरा. पहले मुझे भी विश्वास नहीं हुआ था पर कल से जब दूसरे अख़बारों ने भी (जागरण भी) फई के भारतीय लिंक पर लिखा तब मुझे यकीन होने लगा. जरा इन नामों पर गौर करें. १- लेखक और संपादक कुलदीप नैयर २- अग्निवेश ३- दिलीप पडगांवकर ४-मीरवाइज उमर फारूक ५-राजेंद्र सच्चर [ये ही सच्चर कमिटी के चीफ है जिन्होंने एक तरह से ये पूरा देश मुसलमानों को देने की सिपारिश की है . अब पता चला क्यों की है ] ६ – पत्रकार गौतम नवलखा, ७- इंडिया टुडे के ब्योरो चीफ हरिंदर बवेजा, ८- मनोज जोशी, ९- हामिदा नईम, १०- वेद भसीन, ११- जेडी मोहम्मद १२- अरुंधती रॉय १३-यासीन मालिक १४- कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह

संदीप कौशिक के द्वारा
July 19, 2011

“चाहे कितने ही बम फटें लेकिन लाशों को गिनते समय हम ये जरूर गिनेंगे की कितने हिन्दू थे और कितने मुस्लिम….. जब दंगों से पीड़ित लोगों की गड़ना होगी तो ये हिसाब भी रखना जरूरी होगा कितने पिछड़े थे कितने दलित कितने सामान्य………. ऐसा नहीं करेंगे तो इतिहास में क्या लिखेंगे” . . अत्यंत सामयिक विषय पर बेहतरीन व्यंग्यात्मक आलेख मुनीश जी !

    munish के द्वारा
    July 20, 2011

    धन्यावाद संदीप जी,

RaJ के द्वारा
July 19, 2011

आपके मन की टीस स्वाभाविक क्योंकि यह हर भारतीय की टीस की यहाँ सब कुछ होते हुए हम वो नहीं हैं एक शशक्त राष्ट्र बधाई http://www.jrajeev.jagranjunction.com

    munish के द्वारा
    July 20, 2011

    बिलकुल ठीक कहा आपने लेकिन इस टीस के साथ कब तक जीना पड़ेगा, हम कब तक यों ही लिख लिख कर अपनी भड़ास निकालते रहेंगे प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

atharvavedamanoj के द्वारा
July 19, 2011

मारने न दीजिए भाई मुनीश जी अब आतंकवाद की घटना रोकी थोड़े ही जा सकती है वरन यह बात अवश्य चिता की है की इतने हाई टेक ट्रेनिंग के बाद भी मुए आतंकवादी कुछ १० या २० लोगों को ही मारने में क्यों सफल हुए|मुझे लगता है की इब्की दिग्गी राजा जरुर परेशान हुए होंगें..न तो किसी का फोन पंहुचा और न ही भारतीय जनता ने उनकी इस बार को बयानबाजी को कोई तरजीह दिया|बेचारे शर्म के पाकिस्तान भी नहीं जा सकते..इहाँ उनका प्यारा..दुलारा…सेहतमंद जो ठहरा|हा हा हा हा|बहुत गजब लिखा है भाई..सादर धन्यवाद..वन्देमातरम|

    munish के द्वारा
    July 20, 2011

    वन्दे मातरम् मनोज जी, अरे आपने भी किस नराधम का नाम लिख दिया (दिग्गी) आपका पेन अपवित्र हो गया

subhash के द्वारा
July 19, 2011

bahut badhiya lekh ke liye badhai manmohan jaisa lachar rajneta itihas me nahi tha uska bhi itihas me naam aa gya

    munish के द्वारा
    July 20, 2011

    मैं प्रार्थना करूंगा की मनमोहनजी ज्यादा इतिहास न बनाएं…. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

bharodiya के द्वारा
July 19, 2011

नमक मे भिगोया चाबूक । मारते रहो भाई ।

    munish के द्वारा
    July 20, 2011

    भरोडिया जी, चाबुक चलाता तो रहूँ लेकिन कब तक…… क्या एक शिक्षित समाज को भी चाबुक की जरूरत है

Abdul Rashid के द्वारा
July 19, 2011

बेहतरीन रचना बेहरीन लेख …………………… काश बेहतरीन प्रधान होता? सप्रेम अब्दुल राशीद http://singrauli.jagranjunction.com

    munish के द्वारा
    July 19, 2011

    धन्यवाद अब्दुल भाई,

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
July 19, 2011

S-MMS- से किसी ने बोला की मनमोहन सिंह जी बम फट गए हैं, तो जवाब आया मैनू की, बन्दे ने बोला की सरदार जी आपके देश में तो जवाब आया की तैनू की.इतिहास लिखने की तैयारी चल रही है, फिर उसमें अडंगा कहाँ तक उचित है ? जो हो रहा है होने दो अपने बाप का क्या जाता है? कोई अपने घर के थोड़े ही बम फटने से मर रहा है ? कैटेल क्लास ही तो निपट रही है चलो थोड़ी आबादी कम हो जाएगी इसी बहाने. बड़े ही क्षोभ का वातावरण बनता जा रहा है, जिन्हें कुछ सुनना चाहिए और करना चाहिए वो कान में तेल डाल के और देह में तेल की मालिश करवा के सो रहे हैं. सरे राह जनता लुट पिट रही है और कोई सुनवाई नही हैं. एक बहुत सार्थक लेख के लिए बधाई …. सादर

    munish के द्वारा
    July 19, 2011

    शिवेंद्रजी, आपने बिलकुल ठीक लिखा है…. मनमोहनजी की स्थिति बिलकुल यही है……कभी कभी मनमोहन जी को देखकर क्षोभ होता है की एक राष्ट्र का प्रधानमन्त्री ऐसे मूक कैसे रह सकता है जबकि आज स्थिति उनकी मान मर्यादा तक आ गयी है, प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

Arunesh Mishra के द्वारा
July 19, 2011

बेहतरीन व्यंग इस सड़ते हुए सिस्टम के लिए..

    munish के द्वारा
    July 19, 2011

    धन्यवाद अरुणेश जी

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 18, 2011

बहुत ही बढ़िया तर्कपूर्ण हास्य वयंग्य के लिए मुबारकबाद

    munish के द्वारा
    July 19, 2011

    शुक्रिया राजकमल जी, ये तो मैं आपका ही अनुशरण करने की ही कोशिश कर रहा हूँ

parveensharma के द्वारा
July 18, 2011

मुनीश जी, ठीक कहा आपने गैर जिम्मेदार बयां देने वाले नेताओं और मजबूर प्रधानमन्त्री के कारण देश आतंकवादियों का पिकनिक स्थल बन गया है और जो इसके विरोध में आवाज उठाता है उसे साम्प्रदायिक करार दे दिया जाता है..

    munish के द्वारा
    July 19, 2011

    प्रवीण जी, मुझे तो ये महसूस ही नहीं होता की कोई सरकार भारत में है और किसी नेता को अपनी जिम्मेदारी का अहसास भी है…… प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

Santosh Kumar के द्वारा
July 18, 2011

आदरणीय मुनीश जी , … शब्द नहीं हैं ……..अतुल्य लेखन ……..बधाई ..

    munish के द्वारा
    July 19, 2011

    धन्यवाद संतोष जी,


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